ISRO Achievements 2025-26: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए मील का पत्थर साबित हुआ यह साल
मुख्य आकर्षण (Highlights):
- SPADEX मिशन: अंतरिक्ष में दो उपग्रहों की सफलतापूर्वक डॉकिंग और पावर ट्रांसफर का प्रदर्शन।
- Gaganyaan: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ISS पहुंचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने।
- NISAR मिशन: इसरो और नासा का पहला संयुक्त मिशन 30 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक लॉन्च।
- भारी उपग्रहों का रिकॉर्ड: LVM3-M6 के जरिए भारतीय धरती से सबसे भारी उपग्रह लॉन्च करने का नया कीर्तिमान।
- प्राइवेट सेक्टर का उदय: भारत में अब 400 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स सक्रिय हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए वित्तीय वर्ष 2025-2026 सफलताओं और नए कीर्तिमानों से भरा रहा है। 'स्पेस विजन 2047' की ओर बढ़ते हुए इसरो ने न केवल नई तकनीकों का प्रदर्शन किया, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत किया है।
1. प्रमुख मिशन और ऐतिहासिक डॉकिंग (Major Missions)
इस साल की सबसे बड़ी उपलब्धि SPADEX मिशन रही, जिसमें ISRO ने अंतरिक्ष में दो उपग्रहों (SDX 01 और SDX 02) को आपस में जोड़ने यानी 'डॉकिंग' और बिजली के हस्तांतरण (Power Transfer) का सफल परीक्षण किया। इस सफलता के साथ भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है जिसने अंतरिक्ष में डॉकिंग की क्षमता हासिल की है।
इसके अलावा, 30 जुलाई 2025 को GSLV-F16/NISAR मिशन लॉन्च किया गया। यह नासा और इसरो का पहला संयुक्त मिशन है जो पृथ्वी के अवलोकन के लिए बेहद सटीक डेटा प्रदान कर रहा है।
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2. गगनयान मिशन: अंतरिक्ष में भारतीय कदम
भारत के महत्वाकांक्षी मानव मिशन Gaganyaan के लिए भी यह साल ऐतिहासिक रहा। Axiom-4 मिशन के तहत ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जाने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने, जहाँ उन्होंने 7 माइक्रो-ग्रेविटी प्रयोग किए। मानव रेटिंग के लिए सभी प्रोपल्शन टेस्ट पूरे कर लिए गए हैं और अब तक 8000 से ज्यादा ग्राउंड टेस्ट संपन्न हो चुके हैं।
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3. रॉकेट तकनीक में नए कीर्तिमान
इसरो ने भारी उपग्रहों को लॉन्च करने की अपनी क्षमता में जबरदस्त इजाफा किया है:
- LVM3-M5 / CMS-03: 2 नवंबर 2025 को लॉन्च हुए इस मिशन ने भारतीय मिट्टी से सबसे भारी GTO सैटेलाइट का रिकॉर्ड बनाया।
- LVM3-M6: 24 दिसंबर 2025 को इसरो ने अब तक का सबसे भारी उपग्रह लॉन्च कर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया।
- Semicryogenic Engine: सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के कई सफल परीक्षण किए गए, जो भविष्य के भारी मिशनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
4. इंफ्रास्ट्रक्चर और निजी क्षेत्र की भागीदारी
तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में SSLV लॉन्च कॉम्प्लेक्स (SLC) की आधारशिला 27 अगस्त 2025 को रखी गई। यह विशेष रूप से छोटे उपग्रहों और निजी संस्थाओं के लॉन्च के लिए बनाया जा रहा है। इसके साथ ही भारत में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या 400 के पार पहुँच गई है।
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5. युवा वैज्ञानिकों के लिए अवसर
इसरो ने अपनी आउटरीच गतिविधियों को भी बढ़ाया है। NE-SPARKS कार्यक्रम के जरिए उत्तर-पूर्वी राज्यों के 786 छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ा गया। इसके साथ ही युविका (YUVIKA) कार्यक्रम में भी रिकॉर्ड भागीदारी देखी गई।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: SPADEX मिशन क्या है?
A: यह इसरो का स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट है, जिसमें दो उपग्रहों को अंतरिक्ष में जोड़ने और बिजली ट्रांसफर करने का परीक्षण किया गया है।
Q2: भारत का सबसे भारी उपग्रह कौन सा है?
A: दिसंबर 2025 में लॉन्च हुए LVM3-M6 / BlueBird Block-2 मिशन ने भारतीय जमीन से सबसे भारी उपग्रह लॉन्च करने का रिकॉर्ड बनाया है।
Q3: NISAR मिशन किन दो देशों का संयुक्त प्रयास है?
A: NISAR भारत (ISRO) और अमेरिका (NASA) का पहला संयुक्त पृथ्वी अवलोकन मिशन है।
Q4: 2025-26 में ISRO को कौन से प्रमुख पुरस्कार मिले?
A: इसरो को 2025 में IAA वॉन कर्मन पुरस्कार, चंद्रयान-3 के लिए AIAA गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवार्ड और राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार जैसे कई सम्मान मिले।
निष्कर्ष: 2025-26 का वर्ष इसरो के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता और ग्लोबल कमर्शियल मार्केट में अपनी धाक जमाने वाला रहा है। चाहे वह चंद्रयान-5 (LuPEx) की तैयारी हो या गगनयान की प्रगति, भारत अब अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है।
