ISRO का अगला बड़ा प्लान: क्या भारत अंतरिक्ष में बनाएगा Data Centre?

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब एक बेहद महत्वाकांक्षी और भविष्यवादी विचार पर काम कर रहा है — अंतरिक्ष में भारतीय डेटा सेंटर (Space Data Centres) स्थापित करना। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Indian Space Research Organisation (ISRO) और Department of Space (DoS) इस संभावना का अध्ययन कर रहे हैं कि क्या उपग्रहों द्वारा उत्पन्न डेटा को पहले पृथ्वी पर भेजने के बजाय, सीधे कक्षा (Orbit) में ही प्रोसेस और स्टोर किया जा सकता है।

आज उपग्रह पहले से कहीं अधिक मात्रा में डेटा उत्पन्न कर रहे हैं — बड़ी इमेज फाइलें, तेज डेटा स्ट्रीम और लगातार सिग्नल। ऐसे में पृथ्वी पर मौजूद डेटा सेंटरों और ग्राउंड स्टेशनों पर दबाव बढ़ रहा है। इसी समस्या का समाधान खोजने की दिशा में यह अध्ययन किया जा रहा है।

⚠️ महत्वपूर्ण: अभी यह केवल स्टडी और कॉन्सेप्ट स्टेज में है। कोई आधिकारिक लॉन्च या मिशन तिथि घोषित नहीं की गई है।


अंतरिक्ष में Edge Computing: क्या बदलेगा?

यह विचार मूल रूप से Orbit में Edge Computing का है — यानी डेटा वहीं प्रोसेस किया जाए जहाँ वह उत्पन्न हो रहा है।

अभी की प्रक्रिया:

  1. उपग्रह डेटा कैप्चर करता है

  2. डेटा पृथ्वी पर भेजा जाता है

  3. ग्राउंड डेटा सेंटर उसे प्रोसेस करते हैं

प्रस्तावित मॉडल:

  • Screening

  • Compression

  • Prioritisation

  • First-pass analytics

ये सभी प्रक्रियाएँ अंतरिक्ष में ही हो सकती हैं।

इससे:

  • Downlink बैंडविड्थ की बचत

  • ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर पर कम दबाव

  • तेज निर्णय लेने की क्षमता

संभव हो सकती है।


भारत की मौजूदा स्पेस डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर

भारत पहले से ही मजबूत ग्राउंड-आधारित डेटा सिस्टम रखता है।

Indian Space Science Data Centre (ISSDC)

यह केंद्र मिशनों से आने वाले डेटा को:

  • Ingest

  • Process

  • Archive

  • Disseminate

करता है।

इसने निम्नलिखित मिशनों का डेटा संभाला है:

  • Chandrayaan-1

  • Astrosat

  • Mars Orbiter Mission

नया प्रस्ताव इन ग्राउंड सुविधाओं को समाप्त करने का नहीं है, बल्कि कुछ विशेष उपयोग मामलों में डेटा प्रोसेसिंग का हिस्सा अंतरिक्ष में शिफ्ट करने का है।


अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाना क्यों कठिन है?

अंतरिक्ष एक कठोर वातावरण है। यहाँ डेटा सेंटर चलाना आसान नहीं।

1️⃣ ऊर्जा (Power Generation)

ऑर्बिट में स्थिर और दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति बड़ी चुनौती है।

2️⃣ रेडिएशन (Radiation Protection)

कॉस्मिक रेडिएशन CPU और GPU को नुकसान पहुँचा सकता है।
Radiation-hardened हार्डवेयर की आवश्यकता होगी।

3️⃣ थर्मल मैनेजमेंट

पृथ्वी पर:

  • Air Cooling

  • Liquid Cooling

संभव है।

लेकिन अंतरिक्ष में गर्मी केवल Radiation के जरिए बाहर निकाली जा सकती है।
इससे डिजाइन जटिल हो जाता है।

4️⃣ मेंटेनेंस की समस्या

अंतरिक्ष में मरम्मत करना बेहद कठिन है।
सिस्टम को लंबे समय तक बिना मानवीय हस्तक्षेप के काम करना होगा।

इसीलिए ISRO इसे फिलहाल Feasibility Study और Proof-of-Concept स्तर पर देख रहा है।


स्टार्टअप्स और निजी क्षेत्र की भूमिका

भारत का स्पेस सेक्टर अब निजी कंपनियों के लिए खुल चुका है।
कुछ भारतीय स्टार्टअप्स Low Earth Orbit में डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में भी रुचि दिखा रहे हैं।

भविष्य में मॉडल कुछ ऐसा हो सकता है:

  • ISRO → राष्ट्रीय और रणनीतिक आवश्यकताएँ

  • निजी स्टार्टअप्स → कमर्शियल डेटा एनालिटिक्स सेवाएँ

अगर लागत घटती है और मांग बढ़ती है, तो यह एक बड़ा व्यावसायिक अवसर बन सकता है।


क्या उपग्रह बनेंगे Autonomous Data Platforms?

यदि यह अवधारणा सफल होती है, तो भविष्य के उपग्रह:

❌ सिर्फ डेटा इकट्ठा करने वाले सेंसर नहीं होंगे
✅ बल्कि “Autonomous Data Platforms” बन सकते हैं

वे:

  • डेटा कैप्चर करेंगे

  • स्वयं प्राथमिक विश्लेषण करेंगे

  • केवल महत्वपूर्ण डेटा पृथ्वी पर भेजेंगे

यह मौजूदा ग्राउंड हब जैसे ISSDC का विकल्प नहीं बल्कि पूरक (Complementary) प्रणाली होगी।


निष्कर्ष: क्या “Cloud” पृथ्वी से बाहर जाएगा?

ISRO का यह विचार दर्शाता है कि भारत केवल रॉकेट लॉन्च तक सीमित नहीं है।
अब स्पेस स्ट्रेटेजी में Computing, Storage और Data Processing भी शामिल हो रहे हैं।

यह कोई तात्कालिक लॉन्च प्रोग्राम नहीं है, लेकिन यह संकेत जरूर है कि भारत भविष्य की डेटा अर्थव्यवस्था के लिए अंतरिक्ष-आधारित समाधान तलाश रहा है।

शायद आने वाले समय में “Cloud Computing” का अर्थ केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं रहेगा — बल्कि अंतरिक्ष तक विस्तारित होगा।


❓ FAQ Section

Q1. क्या ISRO सच में अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बना रहा है?

नहीं। अभी ISRO और Department of Space इस विचार का Feasibility Study कर रहे हैं। यह केवल कॉन्सेप्ट स्टेज में है।


Q2. अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने की जरूरत क्यों है?

उपग्रह अब बहुत अधिक मात्रा में डेटा बना रहे हैं। यदि डेटा का प्राथमिक प्रोसेसिंग ऑर्बिट में हो जाए तो:

  • बैंडविड्थ बचेगी

  • तेज निर्णय संभव होंगे

  • ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव कम होगा


Q3. क्या इससे पृथ्वी के डेटा सेंटर खत्म हो जाएंगे?

नहीं। मौजूदा ग्राउंड हब जैसे ISSDC आवश्यक रहेंगे। स्पेस डेटा सेंटर केवल पूरक (Complementary) भूमिका निभाएंगे।


Q4. अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाना इतना कठिन क्यों है?

मुख्य चुनौतियाँ:

  • पावर जनरेशन

  • रेडिएशन से सुरक्षा

  • थर्मल मैनेजमेंट

  • बिना मेंटेनेंस लंबे समय तक संचालन


Q5. क्या निजी कंपनियाँ भी इस क्षेत्र में आ सकती हैं?

हाँ। भारत का स्पेस सेक्टर निजी कंपनियों के लिए खुल चुका है। भविष्य में स्टार्टअप्स कमर्शियल स्पेस डेटा सेवाएँ दे सकते हैं।

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