मिट्टी क्या है? | भारत में मिट्टी के 8 प्रकार और उनकी विशेषताएँ
मिट्टी पृथ्वी की ऊपरी सतह की वह परत है जो चट्टानों के अपक्षय, खनिजों, जैविक पदार्थों, जल और वायु के मिश्रण से बनती है। भारत में विभिन्न जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार भारत में मिट्टी के 8 प्रमुख प्रकार पाए जाते हैं।
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| Map showing the major soil types found across different regions of India. |
मिट्टी क्या है?
मिट्टी पृथ्वी की ऊपरी सतह की वह परत है जो चट्टानों के अपक्षय (Weathering), जैविक पदार्थों, खनिजों, जल और वायु के मिश्रण से बनती है। यही मिट्टी पौधों को पोषक तत्व प्रदान करती है और कृषि के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन मानी जाती है।
कृषि, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के लिए मिट्टी का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मिट्टी की गुणवत्ता और प्रकार कृषि उत्पादन को सीधे प्रभावित करते हैं।
भारत में मिट्टी के प्रकार
भारत में अलग-अलग जलवायु, वर्षा, स्थलाकृति और चट्टानों के कारण कई प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), दिल्ली ने भारत की मिट्टियों को जलवायु, वर्षा, प्रवाह-प्रणाली आदि के आधार पर 8 भागों में बांटा है।
अब प्रश्न उठता है:
मिट्टी के 8 प्रकार कौन से हैं?
भारत में मुख्यतः निम्नलिखित 8 प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं।
1. लाल मिट्टी (Red Soil)
यह मिट्टी मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड से लेकर सुदूर दक्षिण तक पाई जाती है। इसका क्षेत्र लगभग 2 लाख वर्ग किमी है।
यह मिट्टी निम्न क्षेत्रों में पाई जाती है:
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आन्ध्र प्रदेश
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मध्य प्रदेश के रीवा, सतना, पन्ना, छत्तरपुर व रायगढ़ जिले
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बिहार के संथाल परगना और छोटा नागपुर का पठार
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पश्चिम बंगाल के वीरभूम, वर्दमान, बांकुरा और मिदनापुर जिले
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मेघालय की खासी, जयन्तिया और गारो पहाड़ियाँ
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राजस्थान के अरावली पर्वत के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र (उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा व बांसवाड़ा)
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दक्षिण-पूर्वी महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ भाग
इस मिट्टी में लोहे के अंश होते हैं जिसके कारण इसका रंग लाल होता है।
कहीं-कहीं इसका रंग भूरा, चाकलेटी, पीला अथवा काला भी हो जाता है क्योंकि यह ग्रेनाइट आदि चट्टानों से बनती है और चट्टानों के चाकलेट रंग वाले खनिज (जैसे फेल्सपार) के महीन कण इसमें पाए जाते हैं।
2. काली मिट्टी (Black Soil)
इस मिट्टी का निर्माण लावा शैलों की तोड़-फोड़ (Weathering of Lava Rocks) की प्रक्रिया से हुआ है।
इस मिट्टी का रंग काला होता है और इसमें रासायनिक तथा खनिज तत्वों की अधिकता होती है।
इस मिट्टी में कपास की खेती बहुत अच्छी होती है, इसलिए इसे:
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कपास मिट्टी
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रेगर मिट्टी
भी कहा जाता है।
यह मिट्टी निम्न क्षेत्रों में पाई जाती है:
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गुजरात से अमरकंटक तक
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पुणे से बेलगाम तक
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महाराष्ट्र और गुजरात में इसका अधिकांश विस्तार
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पश्चिमी मध्य प्रदेश
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उत्तरी कर्नाटक
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पश्चिमी आन्ध्र प्रदेश
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तमिलनाडु में तिरूनेलवेली से कर्नूल तक
लगभग 5 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में यह मिट्टी विस्तृत है।
विशेषता:
काली मिट्टी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पानी को बहुत लंबे समय तक धारण कर सकती है।
3. लेटराइट मिट्टी (Laterite Soil)
लेट (Late) का अर्थ ईंट (Brick) होता है।
यह मिट्टी ईंट के समान दिखाई पड़ती है इसलिए इसे लैटेराइट मिट्टी कहा जाता है। यह मुख्यतः उष्णकटिबंधीय मानसूनी क्षेत्रों में पाई जाती है।
यह मिट्टी उस क्षेत्र में बनती है जहाँ:
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शुष्क और आर्द्र मौसम बारी-बारी से आते हैं
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वर्षा के कारण चट्टानें टूटती-फूटती रहती हैं
यह मिट्टी मुख्यतः एलुमिना और लोहे के ऑक्साइड से बनी होती है।
इसमें लगभग:
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18.7% लोहे का ऑक्साइड
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33.62% सिलिका
पाया जाता है।
इस मिट्टी में:
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चूना
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पोटाश
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फॉस्फोरिक एसिड
की कमी रहती है, इसलिए इसे कम उपजाऊ मिट्टी माना जाता है।
यह मिट्टी निम्न क्षेत्रों में पाई जाती है:
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राजमहल की पहाड़ियाँ (झारखण्ड)
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ग्वालियर, पन्ना और रीवा (मध्य प्रदेश)
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पूर्वी घाट क्षेत्र
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मेघालय
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उड़ीसा
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कर्नाटक
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दक्षिणी महाराष्ट्र
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मालाबार तट की पहाड़ियाँ
भारत में इसका विस्तार लगभग 1.22 लाख वर्ग किमी है।
4. जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil)
भारत के उत्तरी भाग में जलोढ़ मिट्टी का सबसे अधिक विस्तार है।
यह मिट्टी निम्न क्षेत्रों में पाई जाती है:
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पंजाब
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हरियाणा
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उत्तरी-पूर्वी राजस्थान
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उत्तर प्रदेश (उत्तराखंड को छोड़कर)
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उत्तरी बिहार
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पश्चिम बंगाल (उत्तरी भाग को छोड़कर)
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असम की ब्रह्मपुत्र घाटी
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गुजरात
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पूर्वी और पश्चिमी तटीय मैदान
लगभग 7.68 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में यह मिट्टी पाई जाती है।
इस मिट्टी में बालू की प्रधानता होती है।
भाबर क्षेत्र में इसमें मोटी बालू और कंकड़-पत्थर भी मिलते हैं।
यह एक दोमट मिट्टी है जिसमें:
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चूना
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सोडियम
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पोटाश
-
फॉस्फोरस
पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।
यह मिट्टी हल्के भूरे या पीले रंग की होती है और विभिन्न कृषि फसलों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
जलोढ़ मिट्टी के प्रकार
जलोढ़ मिट्टी तीन प्रकार की होती है:
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पुरातन जलोढ़
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नूतन जलोढ़
-
नूतनतम जलोढ़
पुरातन जलोढ़ को बांगार और नूतन जलोढ़ को खादर कहा जाता है।
जलोढ़ मिट्टी को कांप मिट्टी भी कहते हैं।
5. लवण मिश्रित एवं क्षार युक्त मिट्टी
क्षार युक्त मिट्टी में सोडियम और कैल्शियम तत्व पाए जाते हैं जबकि लवणयुक्त मिट्टी में नाइट्रोजन के लवण होते हैं।
इसे सामान्य भाषा में ऊसर भूमि भी कहा जाता है।
यह मिट्टी भारत के लगभग सभी जलवायु प्रदेशों में पाई जाती है।
इस मिट्टी में उर्वरता कम होती है क्योंकि इसमें:
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जीवाश्म
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जैविक पदार्थ
की कमी होती है।
6. हल्की काली एवं दलदली मिट्टी
जहाँ मिट्टी में:
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वनस्पति के अंश
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जीवाणु
अधिक मात्रा में होते हैं वहाँ की मिट्टी हल्की काली हो जाती है।
यह मिट्टी मुख्यतः नम क्षेत्रों में पाई जाती है।
विशेष रूप से:
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केरल
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उड़ीसा के तटीय भाग
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सुन्दरवन क्षेत्र
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पश्चिम बंगाल के सीमित भाग
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उत्तरी बिहार
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तमिलनाडु का दक्षिण-पूर्वी तट
इन क्षेत्रों में यह मिट्टी पाई जाती है।
7. पर्वतीय मिट्टी (Mountain Soil)
यह मिट्टी मुख्यतः हिमालय क्षेत्र में पाई जाती है।
इसका विस्तार निम्न क्षेत्रों में है:
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जम्मू-कश्मीर
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हिमाचल प्रदेश
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उत्तराखंड का गढ़वाल और कुमाऊँ क्षेत्र
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सिक्किम
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पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग क्षेत्र
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अरुणाचल प्रदेश
यह अपेक्षाकृत नवीन प्रकार की मिट्टी है।
इस मिट्टी में:
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मिट्टी के कण बड़े होते हैं
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कंकड़-पत्थर मिश्रित रहते हैं
कई स्थानों पर इसकी परत बहुत पतली होती है।
इस मिट्टी वाले क्षेत्रों में:
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कहीं घने वन
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कहीं सीढ़ीनुमा खेती (Terrace Farming)
की जाती है।
इसके क्षेत्रीय उपभागों में शामिल हैं:
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चाय मिट्टी
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चना वाली मिट्टी
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टरशरी मिट्टी
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आग्नेय मिट्टी
8. रेतीली या मरुस्थलीय मिट्टी (Desert Soil)
यह मिट्टी निम्न क्षेत्रों में पाई जाती है:
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राजस्थान का पश्चिमी भाग
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पंजाब का दक्षिण-पश्चिमी भाग
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हरियाणा का पश्चिमी भाग
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गुजरात का उत्तरी भाग
इस मिट्टी में:
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कंकड़
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नमक
के अंश भी पाए जाते हैं।
इसमें निम्न तत्वों की कमी होती है:
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नाइट्रोजन
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जीवांश
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अन्य पोषक तत्व
लेकिन यदि सिंचाई के साधन उपलब्ध हों तो यहाँ कृषि की जा सकती है।
इस मिट्टी का विस्तार लगभग 144 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में है।
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| मिट्टी का प्रकार | मुख्य क्षेत्र | प्रमुख फसलें | प्रचुरता | कमी |
|---|---|---|---|---|
| जलोढ़ मिट्टी | गंगा-यमुना मैदान (UP, पंजाब, बिहार) | धान, गेहूँ, गन्ना, दलहन | पोटाश, चूना | नाइट्रोजन, फॉस्फोरस |
| काली मिट्टी | दक्कन ट्रैप (महाराष्ट्र, गुजरात, MP) | कपास, मूंगफली, सोयाबीन | चूना, लोहा, मैग्नीशियम | नाइट्रोजन, फॉस्फोरस |
| लाल मिट्टी | तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश | तंबाकू, बाजरा, तीसी | लोहा ऑक्साइड | नाइट्रोजन, ह्यूमस |
| लेटराइट मिट्टी | पश्चिमी घाट, मेघालय की पहाड़ियाँ | चाय, कॉफी, काजू, रबर | लोहा, एल्युमिनियम | नाइट्रोजन, चूना |
| मरुस्थलीय मिट्टी | पश्चिमी राजस्थान, उत्तरी गुजरात | ज्वार, बाजरा, मोटे अनाज | लवण, फास्फेट | नाइट्रोजन, ह्यूमस |
| पर्वतीय मिट्टी | हिमालयी क्षेत्र (UK, हिमाचल, सिक्किम) | सेब, केसर, मसाले, चाय | जीवांश (Humus) | फास्फोरस, चूना |
| क्षारीय मिट्टी | पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी UP | (सुधार के बाद) धान, गन्ना | सोडियम, पोटेशियम | नाइट्रोजन, कैल्शियम |
| दलदली मिट्टी | तटीय ओडिशा, सुंदरवन (WB), केरल | मैंग्रोव, धान की खेती | जैविक पदार्थ | पोटाश, फास्फेट |
आधुनिक संदर्भ में मिट्टी का महत्व (विश्लेषण)
आज के समय में मिट्टी संरक्षण (Soil Conservation) बहुत महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
भारत में:
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मृदा अपरदन (Soil Erosion)
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अत्यधिक रासायनिक उर्वरक
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जलवायु परिवर्तन
के कारण मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
इसी कारण भारत सरकार और ICAR द्वारा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जैसे:
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Soil Health Card Scheme
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Organic Farming Mission
इनका उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और कृषि उत्पादन बढ़ाना है।
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| भारत में पाई जाने वाली प्रमुख 8 प्रकार की मिट्टियों का इन्फोग्राफिक |
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भारतीय मिट्टी को कितने भागों में विभाजित किया है?
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने भारत की मिट्टियों को 8 प्रमुख भागों में विभाजित किया है।
2. भारत में सबसे अधिक कौन सी मिट्टी पाई जाती है?
भारत में सबसे अधिक जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) का विस्तार पाया जाता है, जो मुख्य रूप से गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी के मैदानों में मिलती है।
3. कपास मिट्टी किसे कहते हैं?
काली मिट्टी (Black Soil) को कपास मिट्टी कहा जाता है क्योंकि इसमें कपास की खेती सबसे अच्छी होती है।
4. लाल मिट्टी का सबसे अधिक विस्तार किस राज्य में है?
भारत में लाल मिट्टी का सबसे अधिक विस्तार तमिलनाडु राज्य में पाया जाता है।
5. निक्षालन की प्रक्रिया से किस मिट्टी का निर्माण होता है?
निक्षालन (Leaching) की प्रक्रिया से लेटराइट मिट्टी का निर्माण होता है।
6. चाय की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी कौन सी है?
चाय की खेती के लिए पर्वतीय मिट्टी (Mountain Soil) सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
7. सुन्दरी वृक्ष किस मिट्टी में उगता है?
सुन्दरी वृक्ष डेल्टाई मिट्टी (Delta Soil) में उगता है, जो नदी के डेल्टा क्षेत्रों में पाई जाती है।
8. नमकीन एवं क्षारीय मिट्टी को बिहार में क्या कहा जाता है?
बिहार में नमकीन और क्षारीय मिट्टी को ऊसर या रेह मिट्टी कहा जाता है।
9. 7 से कम pH वाली मिट्टी को क्या कहते हैं?
जिस मिट्टी का pH मान 7 से कम होता है, उसे अम्लीय मिट्टी (Acidic Soil) कहा जाता है।
10. रेंगती हुई मृत्यु किसे कहा जाता है?
मृदा के सतह अपरदन (Soil Erosion) को रेंगती हुई मृत्यु कहा जाता है क्योंकि यह धीरे-धीरे भूमि की उर्वरता को समाप्त कर देता है।

