RBI का नया Data Centre: भुवनेश्वर में हाई-सिक्योरिटी हब

RBI Data Centre Bhubaneswar | India Financial Infrastructure Security | Tier IV Data Centre

RBI का भुवनेश्वर में बना Tier IV हाई-सिक्योरिटी डेटा सेंटर, भारत की वित्तीय और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने वाला अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर

भारत की वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ओडिशा के भुवनेश्वर में एक अत्याधुनिक और उच्च-सुरक्षा डेटा सेंटर स्थापित किया है। यह जानकारी Press Trust of India (PTI) की रिपोर्ट के माध्यम से सामने आई है।

यह डेटा सेंटर रणनीतिक रूप से भारत की सीमाओं और उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर बनाया गया है, ताकि देश की महत्वपूर्ण वित्तीय अवसंरचना (Critical Financial Infrastructure) को किसी भी बाहरी या प्राकृतिक खतरे से सुरक्षित रखा जा सके।


📍 रणनीतिक स्थान: क्यों चुना गया भुवनेश्वर?

यह नया ग्रीनफील्ड डेटा सेंटर ओडिशा के खुर्दा जिले के Info Valley-II में 18.55 एकड़ के विशाल परिसर में स्थापित किया गया है।

इस स्थान के चयन के प्रमुख कारण:

  • भारत की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं से दूर

  • संभावित सीमा पार मिसाइल या ड्रोन हमलों से कम जोखिम

  • उच्च भूकंप जोखिम वाले क्षेत्रों से बाहर

  • समुद्री केबल लैंडिंग प्वाइंट से दूर

  • डिजिटल ट्रैफिक के घने नेटवर्क हब से अलग

विश्लेषकों के अनुसार, भुवनेश्वर का चयन राष्ट्रीय सुरक्षा दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है।


🏗️ Tier IV Certification: उच्चतम विश्वसनीयता मानक

यह सुविधा Tier IV Design Certification प्राप्त कर चुकी है, जो डेटा सेंटर विश्वसनीयता और प्रदर्शन का सबसे उच्च मानक माना जाता है।

Tier IV का मतलब क्या है?

  • 99.995% अपटाइम

  • पूर्ण फॉल्ट टॉलरेंस

  • किसी भी तकनीकी खराबी के बावजूद संचालन जारी रखने की क्षमता

  • मिशन-क्रिटिकल सिस्टम्स के लिए सर्वोत्तम सुरक्षा

यह डेटा सेंटर RBI की निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रणालियों को सपोर्ट करेगा:

  • मुद्रा प्रबंधन प्रणाली

  • भुगतान एवं निपटान प्रणाली (Payment & Settlement Operations)

  • नियामकीय डेटा प्रबंधन


⚠️ 2025 भारत-पाकिस्तान तनाव से मिला सबक

विश्लेषकों का मानना है कि इस रणनीतिक सोच को बल पिछले वर्ष 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान मिला।

रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 में सीमा पर ड्रोन हमलों के बीच एक प्रमुख वाणिज्यिक बैंक ने अपना डेटा सेंटर जयपुर से मुंबई रातोंरात स्थानांतरित कर दिया था। इस घटना ने वित्तीय संस्थानों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की थीं।

इसी अनुभव के आधार पर RBI ने ऐसा स्थान चुना जो संभावित सैन्य या साइबर खतरों से अधिक सुरक्षित हो।


🌐 मुंबई-चेन्नई से अलग रणनीति

भारत के अधिकांश डेटा सेंटर वर्तमान में मुंबई और चेन्नई में स्थित हैं, क्योंकि ये प्रमुख समुद्री संचार केबलों के लैंडिंग प्वाइंट हैं।

लेकिन:

  • ओडिशा किसी बड़े अंडरसी कम्युनिकेशन केबल का लैंडिंग प्वाइंट नहीं है

  • यहाँ डिजिटल ट्रैफिक का घनत्व अपेक्षाकृत कम है

  • साइबर हमलों की सघनता से बचाव संभव

विश्लेषकों के अनुसार, RBI संभवतः अधिक "इंसुलेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर" बनाना चाहता है, जो साइबर जोखिमों से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहे।


🏢 RBI का दूसरा डेटा सेंटर

भुवनेश्वर स्थित यह सुविधा RBI का दूसरा डेटा सेंटर है।

पहला डेटा सेंटर कहाँ है?

  • प्राथमिक डेटा सेंटर: खारघर, नवी मुंबई

परियोजना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी:

  • मार्च 2023 में पूर्व RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने शिलान्यास किया

  • RBI की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Indian Financial Technologies and Allied Services ने निर्माण का अनुबंध दिया

  • ₹169 करोड़ का निर्माण अनुबंध Ahluwalia Contracts को दिया गया

  • Engineers India Limited ने कॉन्सेप्ट से कमीशनिंग तक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सेवाएँ प्रदान कीं


☁️ क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में RBI का अगला कदम

RBI केवल डेटा सेंटर निर्माण तक सीमित नहीं है।

वर्तमान पहल:

  • मुंबई और हैदराबाद में क्लाउड डेटा सेंटर पायलट प्रोजेक्ट

  • वित्तीय कंपनियों के लिए लोकल क्लाउड स्टोरेज सुविधा

  • मिशन-क्रिटिकल सिस्टम्स पर सीधा संस्थागत नियंत्रण


🏦 व्यापक नीति का हिस्सा

यह डेटा सेंटर भारत के वित्तीय नियामकों द्वारा शुरू की गई एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

अन्य संस्थान भी इसी दिशा में:

  • भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI)

  • भारतीय स्टेट बैंक (SBI)

दोनों अपने स्वयं के डेटा सेंटर बना रहे हैं या निर्माण की प्रक्रिया में हैं।


🔐 वित्तीय डेटा = राष्ट्रीय अवसंरचना

विश्लेषकों के अनुसार:

"अब वित्तीय डेटा को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना (Critical National Infrastructure) के रूप में देखा जा रहा है। RBI का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि भारत मिशन-क्रिटिकल सिस्टम्स पर सख्त संस्थागत नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, बाहरी खतरों को कम करना चाहता है, और चरम परिस्थितियों में भी देश की वित्तीय रीढ़ को निर्बाध बनाए रखना चाहता है।"


निष्कर्ष

भुवनेश्वर में RBI का नया Tier IV डेटा सेंटर केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत की वित्तीय सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ है।

सीमाओं से दूरी, भूकंप जोखिम से सुरक्षा, साइबर हमलों से बचाव, और उच्चतम विश्वसनीयता मानकों के साथ यह केंद्र भविष्य की अनिश्चित परिस्थितियों में भी देश की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करेगा।

🔹 FAQ

Q1. RBI का नया डेटा सेंटर कहाँ बनाया गया है?
भुवनेश्वर, ओडिशा के Info Valley-II (खुर्दा) में 18.55 एकड़ परिसर में।

Q2. यह डेटा सेंटर Tier IV क्यों महत्वपूर्ण है?
Tier IV डेटा सेंटर सबसे उच्च विश्वसनीयता मानक होता है, जिसमें लगभग 99.995% अपटाइम और फॉल्ट टॉलरेंस होती है।

Q3. भुवनेश्वर स्थान क्यों चुना गया?
यह स्थान सीमाओं, उच्च भूकंप क्षेत्रों और प्रमुख समुद्री केबल हब से दूर है, जिससे सुरक्षा बढ़ती है।

Q4. क्या यह RBI का पहला डेटा सेंटर है?
नहीं, यह दूसरा डेटा सेंटर है। पहला नवी मुंबई के खारघर में स्थित है।

Q5. RBI क्लाउड सुविधा कहाँ शुरू कर रहा है?
मुंबई और हैदराबाद में क्लाउड डेटा सेंटर पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है।

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