दुनिया का "सबसे पुराना ऑक्टोपस" असल में ऑक्टोपस निकला ही नहीं! वैज्ञानिकों के नए खुलासे ने सबको चौंकाया
विज्ञान की दुनिया में अक्सर पुरानी खोजों को नई तकनीक की कसौटी पर परखा जाता है और नतीजे हैरान कर देने वाले होते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है उस जीवाश्म (Fossil) के साथ जिसे पिछले 25 सालों से "दुनिया का सबसे पुराना ऑक्टोपस" माना जा रहा था।
क्या है पूरा मामला?
इलिनोइस, अमेरिका के मेज़ोन क्रीक (Mazon Creek) में करीब 300 मिलियन साल पुराना एक जीवाश्म मिला था, जिसका नाम Pohlsepia mazonensis रखा गया था। साल 2000 में हुए एक अध्ययन के बाद इसे 'दुनिया का सबसे पुराना ऑक्टोपस' घोषित कर दिया गया और इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हो गया।
वैज्ञानिकों का मानना था कि इसके आठ हाथ और पंख (fins) हैं, जो इसे आधुनिक ऑक्टोपस का पूर्वज बनाते हैं। लेकिन हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग (University of Reading) के वैज्ञानिकों ने इस दावे को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है।
नई तकनीक ने खोला "दांतों" का राज
वैज्ञानिकों ने इस जीवाश्म की जांच के लिए 'सिंक्रोट्रॉन इमेजिंग' (Synchrotron Imaging) का इस्तेमाल किया। यह तकनीक सूरज की रोशनी से भी करोड़ों गुना ज्यादा तेज प्रकाश की किरणों का उपयोग करती है, जिससे पत्थर के अंदर छिपी बारीक से बारीक संरचना देखी जा सकती है।
जब इस 'सफेद मलबे' जैसे दिखने वाले जीवाश्म को स्कैन किया गया, तो उसके अंदर छोटे-छोटे दांतों की एक कतार (Radula) मिली।
खोज में क्या मिला?
दांतों की संख्या: इस जीव के दांतों की कतार में 11 दांत थे। ऑक्टोपस के दांतों की कतार में केवल 7 या 9 दांत होते हैं।
असली पहचान: दांतों की यह बनावट आधुनिक 'नॉटिलस' (Nautilus) के पूर्वजों से मिलती है।
गलतफहमी की वजह: वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवाश्म बनने से पहले यह जीव सड़ने लगा था, जिससे इसका खोल (shell) अलग हो गया और यह दिखने में ऑक्टोपस जैसा लगने लगा।
अब क्या बदलेगा?
इतिहास की तारीख: इस खुलासे के बाद ऑक्टोपस के विकास (Evolution) का टाइमलाइन बदल गया है। अब माना जा रहा है कि ऑक्टोपस का जन्म जुरासिक काल (Jurassic Period) के आसपास हुआ था।
नया रिकॉर्ड: Pohlsepia से ऑक्टोपस का ताज तो छिन गया है, लेकिन अब यह 'दुनिया का सबसे पुराना नॉटिलॉइड सॉफ्ट टिश्यू जीवाश्म' बन गया है।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी पुष्टि की है कि वे अब इस जीवाश्म को 'सबसे पुराने ऑक्टोपस' के रूप में नहीं पहचानेंगे।
निष्कर्ष
यह खोज हमें बताती है कि विज्ञान कभी रुकता नहीं है। आधुनिक तकनीक की मदद से हम करोड़ों साल पुराने रहस्यों को आज बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं। अब वैज्ञानिकों की तलाश फिर से शुरू हो गई है कि आखिर असली 'सबसे पुराना ऑक्टोपस' कौन सा है!
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