हरित इस्पात उत्पादन में परमाणु ऊर्जा की भूमिका: कार्बन तटस्थ भविष्य की ओर एक कदम

Nuclear energy powered hydrogen production for green steel manufacturing.

इस्पात आधुनिक बुनियादी ढांचे, वैश्विक उद्योग, परिवहन और विनिर्माण की रीढ़ है। वर्ष 2022-23 में विश्वभर में लगभग 2.0 बिलियन मीट्रिक टन कच्चे इस्पात का उत्पादन हुआ। यह मात्रा इतनी अधिक है कि इसे पृथ्वी के प्रत्येक व्यक्ति के लिए लगभग 250 किलोग्राम स्टील प्रति वर्ष के बराबर माना जा सकता है।

हालांकि, पारंपरिक इस्पात उत्पादन मुख्यतः कोकिंग कोयले और ब्लास्ट फर्नेस पर निर्भर करता है, जिससे भारी मात्रा में कार्बन डाईऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जित होती है। अनुमान है कि इस्पात उद्योग वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का लगभग 10% योगदान करता है।

ऐसे में, हरित इस्पात (Green Steel) और परमाणु ऊर्जा आधारित हाइड्रोजन उत्पादन एक टिकाऊ समाधान के रूप में उभर रहे हैं।

पारंपरिक इस्पात उत्पादन की चुनौती

ब्लास्ट फर्नेस तकनीक में कोयले से बने कोक का उपयोग लौह अयस्क को स्टील में बदलने के लिए किया जाता है। यह प्रक्रिया ऊर्जा-सघन है और भारी मात्रा में CO₂ उत्सर्जित करती है।

तेजी से शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों के कारण आने वाले दशकों में इस्पात की मांग और बढ़ने वाली है। इसलिए डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में तत्काल कदम उठाना आवश्यक है।

हरित इस्पात क्या है?

हरित इस्पात वह इस्पात है जिसका उत्पादन कम या शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ किया जाता है।

इसमें हाइड्रोजन आधारित डायरेक्ट रिडक्शन प्रक्रिया अपनाई जाती है, जहां कोयले की जगह हाइड्रोजन का उपयोग होता है।

मुख्य अंतर:

पारंपरिक विधिहरित विधि
कोकिंग कोयलास्वच्छ हाइड्रोजन
CO₂ उत्सर्जनकेवल जल वाष्प (H₂O)
उच्च कार्बन प्रभावनिम्न कार्बन प्रभाव

परमाणु ऊर्जा: हरित इस्पात की कुंजी

परमाणु ऊर्जा संयंत्र निम्न-कार्बन बिजली उत्पादन के लिए जाने जाते हैं।

जब परमाणु रिएक्टरों को हाइड्रोजन उत्पादन सुविधाओं के साथ जोड़ा जाता है, तो वे ऊर्जा और हाइड्रोजन दोनों का सह-उत्पादन कर सकते हैं।

हाइड्रोजन उत्पादन की दो प्रमुख तकनीकें:

1️⃣ जल इलेक्ट्रोलिसिस (Water Electrolysis)

  • तापमान: 100°C से कम

  • बिजली से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है

  • दशकों से व्यावसायिक रूप से उपलब्ध

2️⃣ उच्च तापमान भाप इलेक्ट्रोलिसिस

  • तापमान: 700–800°C

  • कम बिजली की आवश्यकता

  • रिएक्टर ताप का उपयोग

इलेक्ट्रोलाइज़र तकनीक में सुधार से दक्षता बढ़ रही है और लागत घट रही है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में मिनेसोटा के प्रेयरी द्वीप परमाणु संयंत्र में उच्च तापमान इलेक्ट्रोलाइज़र स्थापित किया जा रहा है, जो रिएक्टर की गर्मी का उपयोग कर बिजली की खपत कम करता है।


अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का दृष्टिकोण

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA), वियना के परमाणु ऊर्जा प्रभाग के निदेशक एलाइन डेस क्लोइज़ो तथा तकनीकी प्रमुख फ्रांसेस्को गैंडा ने इस्पात उत्पादन के डीकार्बोनाइजेशन में परमाणु ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया है।

उनके अनुसार, हरित इस्पात के लिए स्वच्छ हाइड्रोजन की मांग अत्यधिक बढ़ने वाली है, और परमाणु ऊर्जा इस आवश्यकता को पूरा करने में निर्णायक साबित हो सकती है।


ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा

विकासशील देशों में तेजी से बढ़ते इस्पात उद्योग के लिए ऊर्जा सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।

परमाणु ऊर्जा के लाभ:

  • स्थिर और निर्बाध बिजली आपूर्ति

  • ईंधन मूल्य अस्थिरता से मुक्त

  • लंबी परिचालन अवधि

  • कम ईंधन आवश्यकता

  • दीर्घकालिक लागत प्रभावशीलता

यह विशेषताएं औद्योगिक स्थिरता और सतत विकास को मजबूत करती हैं।


तकनीकी नवाचार और अनुसंधान

इस्पात उत्पादन में परमाणु ऊर्जा के उपयोग से:

  • नए रिएक्टर डिजाइन विकसित किए जा सकते हैं

  • उन्नत इलेक्ट्रोलाइज़र तकनीक विकसित हो सकती है

  • नए उत्प्रेरक और सामग्री खोजी जा सकती हैं

  • ऊर्जा दक्षता बढ़ सकती है

  • पर्यावरणीय प्रभाव कम हो सकता है

परमाणु और इस्पात उद्योगों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान नवाचार को गति दे सकता है।

भारत के लिए महत्व

भारत अगले पांच वर्षों में वैश्विक स्तर पर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखता है।

"मेक इन इंडिया" और "स्मार्ट सिटी मिशन" जैसी पहलों के चलते इस्पात की मांग में तेज वृद्धि होगी।

ऐसे में परमाणु ऊर्जा आधारित हरित इस्पात उत्पादन:

  • भारत की बढ़ती स्टील मांग को पूरा कर सकता है

  • जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकता है

  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर सकता है

  • आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित कर सकता है


चुनौतियां

हालांकि संभावनाएं व्यापक हैं, लेकिन:

  • बुनियादी ढांचे में भारी निवेश आवश्यक है

  • नियामक ढांचे को मजबूत करना होगा

  • सार्वजनिक स्वीकृति जरूरी है

  • परमाणु सुरक्षा और अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा


निष्कर्ष

स्टील उत्पादन के डीकार्बोनाइजेशन में परमाणु ऊर्जा एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती है।

यदि रणनीतिक योजना, अनुसंधान और निवेश को प्राथमिकता दी जाए, तो हरित इस्पात भविष्य की औद्योगिक क्रांति का आधार बन सकता है।

यह न केवल आर्थिक समृद्धि लाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

 FAQ

Q1. हरित इस्पात क्या है?

हरित इस्पात वह इस्पात है जिसका उत्पादन कम या शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ हाइड्रोजन जैसी स्वच्छ तकनीकों का उपयोग करके किया जाता है।

Q2. परमाणु ऊर्जा हरित इस्पात उत्पादन में कैसे मदद करती है?

परमाणु ऊर्जा निम्न-कार्बन बिजली प्रदान करती है, जिससे इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से स्वच्छ हाइड्रोजन उत्पादन संभव होता है, जो कोयले की जगह उपयोग किया जा सकता है।

Q3. जल इलेक्ट्रोलिसिस क्या है?

यह प्रक्रिया बिजली की सहायता से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करती है।

Q4. उच्च तापमान इलेक्ट्रोलिसिस के क्या लाभ हैं?

यह कम बिजली की आवश्यकता रखता है और रिएक्टर ताप का उपयोग करके अधिक दक्ष हाइड्रोजन उत्पादन करता है।

Q5. भारत के लिए हरित इस्पात क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में बढ़ती औद्योगिक मांग और जलवायु लक्ष्यों को देखते हुए हरित इस्पात सतत विकास और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भीषण भट्टियों में, जहां फौलाद के सपने जलते हैं,

हरित हाइड्रोजन की चमक, उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है।


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 भानु प्रकाश सिंह एक वरिष्ठ प्रायोगिक न्यूक्लियर भौतिक विज्ञानी हैं, औरअलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत, के भौतिकी विभाग में प्रोफेसर हैं। (लेखक)
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