सुपरकंप्यूटर ने खोला अंतरिक्ष का राज: 90% सैटेलाइट क्यों हो जाते हैं अस्थिर?

Illustration showing Earth and Moon surrounded by multiple satellite orbits with supercomputer servers, representing a study where 10 lakh satellites were simulated in cislunar space and only 9.7% remained stable.

अंतरिक्ष अनुसंधान में एक नई और बेहद रोचक खोज सामने आई है। वैज्ञानिकों ने सुपरकंप्यूटर की मदद से पृथ्वी और चंद्रमा के बीच मौजूद सिसलूनर स्पेस (Cislunar Space) में 10 लाख काल्पनिक सैटेलाइट्स की कक्षाओं (orbits) का सिमुलेशन किया - और परिणाम चौंकाने वाले रहे।

करीब 90% सैटेलाइट्स लंबी अवधि तक स्थिर नहीं रह पाए, जबकि केवल लगभग 9.7% कक्षाएँ छह वर्षों तक स्थिर बनी रहीं

लेकिन क्या यह अंतरिक्ष मिशनों के लिए खतरे की घंटी है? आइए विस्तार से समझते हैं।


🚀 सिसलूनर स्पेस क्या है?

सिसलूनर स्पेस वह क्षेत्र है जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच फैला हुआ है। अभी अधिकांश सैटेलाइट्स लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में काम करते हैं, जो पृथ्वी की सतह से लगभग 2,000 किमी तक फैला है।

लेकिन जैसे-जैसे सैटेलाइट्स की संख्या बढ़ रही है - खासकर मेगाकॉन्स्टेलेशन प्रोजेक्ट्स (जैसे Starlink) के कारण - LEO भविष्य में भीड़भाड़ वाला हो सकता है।

ऐसे में वैज्ञानिक भविष्य के लिए सिसलूनर क्षेत्र को संभावित विकल्प के रूप में देख रहे हैं।


🛰️ क्यों जरूरी है सिसलूनर ऑर्बिट?

  1. 🌐 भविष्य में चंद्रमा पर मानव कॉलोनी के लिए इंटरनेट और संचार

  2. 🔭 गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए ट्रांजिट पॉइंट

  3. 📡 पृथ्वी और चंद्रमा के बीच बेहतर नेविगेशन नेटवर्क

  4. 🧭 स्पेस लॉजिस्टिक्स और ईंधन डिपो की संभावनाएँ

लेकिन समस्या यह है कि सिसलूनर क्षेत्र का गुरुत्वाकर्षण वातावरण बेहद जटिल है।


🧲 गुरुत्वाकर्षण की जंग: Earth vs Moon vs Sun

सिसलूनर क्षेत्र में सैटेलाइट्स तीन बड़े पिंडों के गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होते हैं:

  • 🌍 पृथ्वी

  • 🌕 चंद्रमा

  • ☀️ सूर्य

यह “ग्रैविटेशनल टग-ऑफ-वार” कक्षाओं को अस्थिर बना सकता है।

इसके अलावा:

  • पृथ्वी पूरी तरह गोल नहीं है - उसका गुरुत्वाकर्षण असमान (blobby) है

  • सूर्य का विकिरण (Solar Radiation Pressure) कक्षा को बदल सकता है

  • पृथ्वी का चुंबकीय सुरक्षा कवच इस क्षेत्र में कमजोर पड़ जाता है

इन सभी कारकों के कारण सटीक भविष्यवाणी करना बेहद कठिन हो जाता है।


💻 सुपरकंप्यूटर से 10 लाख सिमुलेशन

वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटर की मदद से लगभग 1 मिलियन संभावित कक्षाओं का विश्लेषण किया।

  • कुल कंप्यूटिंग समय: ~16 लाख CPU घंटे

  • एक सामान्य कंप्यूटर को लगता: लगभग 182 साल

  • सुपरकंप्यूटर ने पूरा किया: सिर्फ 3 दिन में

📊 परिणाम:

अवधिस्थिर कक्षाओं का प्रतिशत
1 वर्ष~54%
6 वर्ष~9.7%

मतलब 10 लाख में से लगभग 97,000 कक्षाएँ दीर्घकालिक रूप से स्थिर पाई गईं


⚠️ क्या यह चिंता की बात है?

पहली नजर में 10% सफलता दर कम लग सकती है, लेकिन:

  • 97,000 संभावित स्थिर कक्षाएँ बहुत बड़ी संख्या है

  • असफल कक्षाओं का डेटा भी भविष्य की योजना बनाने में मदद करेगा

  • इससे वैज्ञानिकों को सुरक्षित, दीर्घकालिक मिशन डिज़ाइन करने में सहायता मिलेगी

यह अध्ययन अंतरिक्ष इंजीनियरिंग और डेटा साइंस के लिए बेहद मूल्यवान है।


🌌 भविष्य की दिशा: चंद्र कॉलोनी और स्पेस नेटवर्क

आने वाले दशकों में:

  • चंद्रमा पर स्थायी मानव मिशन

  • सिसलूनर इंटरनेट नेटवर्क

  • स्पेस-आधारित नेविगेशन सिस्टम

  • डीप स्पेस लॉन्च प्लेटफॉर्म

इन सभी के लिए सिसलूनर कक्षाओं की गहरी समझ जरूरी होगी।

यह अध्ययन उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


🧠 सरल शब्दों में समझें

अगर पृथ्वी के चारों ओर सैटेलाइट रखना एक “स्थिर झूला” है,
तो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच सैटेलाइट रखना “तीन अलग-अलग दिशाओं से खींचे जा रहे झूले” जैसा है।

इसलिए हर कक्षा स्थिर नहीं रह सकती - लेकिन जो स्थिर हैं, वे भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की नींव बन सकती हैं।


📌 निष्कर्ष

✔ 10 लाख में से 9.7% कक्षाएँ 6 साल तक स्थिर रहीं
✔ सिसलूनर स्पेस भविष्य की अंतरिक्ष गतिविधियों का केंद्र बन सकता है
✔ सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन अंतरिक्ष योजना में क्रांति ला रहे हैं
✔ यह अध्ययन मानव जाति की अगली अंतरिक्ष छलांग की तैयारी है

✅ FAQ

❓1. Cislunar Space क्या है?

Cislunar Space वह अंतरिक्ष क्षेत्र है जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच स्थित है। यह भविष्य के चंद्र मिशनों और सैटेलाइट नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


❓2. 10 लाख सैटेलाइट्स की सिमुलेशन क्यों की गई?

वैज्ञानिकों ने यह समझने के लिए सिमुलेशन किया कि पृथ्वी-चंद्रमा के बीच कौन-सी कक्षाएँ (orbits) लंबे समय तक स्थिर रह सकती हैं।


❓3. कितने प्रतिशत ऑर्बिट स्थिर पाई गईं?

लगभग 54% कक्षाएँ एक वर्ष तक स्थिर रहीं, लेकिन केवल 9.7% कक्षाएँ छह वर्षों तक स्थिर बनी रहीं।


❓4. Cislunar Orbit अस्थिर क्यों होती है?

इस क्षेत्र में पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण का संयुक्त प्रभाव होता है। इसके अलावा सोलर रेडिएशन और पृथ्वी की असमान गुरुत्वाकर्षण संरचना भी ऑर्बिट को प्रभावित करती है।


❓5. क्या यह भविष्य की चंद्र कॉलोनी के लिए खतरा है?

नहीं। हालांकि कई कक्षाएँ अस्थिर पाई गईं, फिर भी लगभग 97,000 संभावित स्थिर ऑर्बिट उपलब्ध हैं, जो भविष्य के मिशनों के लिए पर्याप्त हैं।


❓6. यह अध्ययन भविष्य में कैसे मदद करेगा?

यह डेटा वैज्ञानिकों को सुरक्षित और दीर्घकालिक सैटेलाइट मिशन डिजाइन करने में मदद करेगा, खासकर चंद्रमा और डीप स्पेस मिशनों के लिए।


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