Puch AI Controversy: ₹25,000 करोड़ MoU रद्द, 4 दिनों में बदली पूरी कहानी
लखनऊ/बेंगलुरु | विशेष रिपोर्ट : उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और टेक इतिहास में मार्च 2026 का सप्ताह एक बड़े घटनाक्रम के रूप में दर्ज हो गया है।
₹25,000 करोड़ के एक बड़े AI प्रोजेक्ट को लेकर किया गया समझौता (MoU) कुछ ही दिनों में विवादों में घिरा और अंततः रद्द कर दिया गया।
यह पूरा मामला बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप Puch AI और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच हुए समझौते से जुड़ा है, जिसने भारतीय स्टार्टअप ईकोसिस्टम, AI सेक्टर और सरकारी प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🏛️ 23 मार्च: ‘AI Pradesh’ का बड़ा ऐलान
23 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने X (Twitter) पर घोषणा की कि राज्य सरकार ने Puch AI के साथ ₹25,000 करोड़ का MoU साइन किया है।
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को भारत का पहला AI-ड्रिवन राज्य बनाना था।
📊 प्रस्तावित प्रोजेक्ट के मुख्य घटक:
- AI पार्क (Innovation hubs)
- डेटा सेंटर (Data infrastructure)
- AI यूनिवर्सिटी (Education & skilling)
- AI कॉमन्स (जनता के लिए AI प्लेटफॉर्म)
लखनऊ एयरपोर्ट के पास 40 एकड़ जमीन भी चिन्हित की गई थी।
🏢 Puch AI: एक साल पुराना स्टार्टअप
विवाद की जड़ में कंपनी की प्रोफाइल थी।
- स्थापना: जून 2025
- लोकेशन: बेंगलुरु
- संस्थापक: सिद्धार्थ भाटिया और अरिजीत जैन
सिद्धार्थ भाटिया का बैकग्राउंड:
- BITS Pilani
- NUS (PhD in Computer Science)
- Google Research और AWS में अनुभव
📱 बिजनेस मॉडल: ‘Distribution-First’ रणनीति
Puch AI का फोकस AI को mass level तक पहुंचाना है।
प्रमुख विशेषताएं:
- WhatsApp आधारित AI chatbot
- Voice कॉल के जरिए AI access
- 22 भारतीय भाषाओं में सेवा
- 9090909090 नंबर के जरिए उपयोग
कंपनी ने खुद को OpenAI और Google Gemini से अलग दिखाने के लिए
“distribution-first model” अपनाया।
⚠️ विवाद की शुरुआत: Revenue पर सवाल
MoU के कुछ घंटों के भीतर ही सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे।
Twitter के Community Notes में दावा किया गया कि कंपनी का सालाना revenue ₹50 लाख से भी कम है।
🔍 ‘Puch AI’ vs ‘Pucho AI’ विवाद
Founder सिद्धार्थ भाटिया ने इस दावे को गलत बताया।
उनका कहना था:
- ₹42.9 लाख का आंकड़ा गलत है
- यह “Pucho AI” नाम की दूसरी कंपनी का डेटा है
- Google AI की गलती से confusion हुआ
उन्होंने यह भी कहा कि Puch AI “well-funded startup” है, लेकिन वास्तविक revenue सार्वजनिक नहीं किया गया।
📢 मार्केटिंग रणनीतियां भी चर्चा में
Puch AI पहले भी aggressive marketing के कारण सुर्खियों में रहा है:
प्रमुख उदाहरण:
- Perplexity AI को $50 billion में खरीदने का प्रस्ताव
- Lionel Messi India Tour sponsorship
- Times of India front-page teaser ad
इन अभियानों ने कंपनी की छवि को वास्तविक आकार से बड़ा दिखाया।
🏛️ राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष का हमला
विवाद बढ़ने पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा:
👉 “MoU साइन करने से पहले AI से ही पूछ लेना चाहिए था।”
उन्होंने पारदर्शिता की कमी और संभावित अनियमितताओं पर सवाल उठाए।
🔎 सरकार की सफाई और जांच
बढ़ते विवाद के बीच सरकार ने स्पष्टीकरण दिया:
- MoU non-binding था
- यह केवल प्रारंभिक समझौता था
- अंतिम निर्णय due diligence के बाद होगा
Invest UP ने कंपनी को 3 दिन में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा।
❌ 26 मार्च: MoU रद्द
जांच के बाद 26 मार्च 2026 को सरकार ने MoU रद्द कर दिया।
आधिकारिक कारण:
- पर्याप्त net worth का अभाव
- वित्तीय संबंधों की कमी
- समय पर दस्तावेज प्रस्तुत न करना
- परियोजना के पैमाने पर संदेह
सरकार ने कहा कि यह निर्णय “transparency और probity” को ध्यान में रखकर लिया गया है।
🧪 तकनीकी विवाद: ‘Foundation Model’ या ‘Wrapper’?
विशेषज्ञों ने कंपनी की तकनीक पर भी सवाल उठाए।
- दावा: Google Gemma मॉडल का उपयोग
- आरोप: केवल wrapper AI
हालांकि, कंपनी ने कहा कि उन्होंने भारतीय उपयोग के लिए खुद का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है। लेकिन इसका कोई सार्वजनिक तकनीकी प्रमाण उपलब्ध नहीं था।
🔮 आगे की रणनीति: AI Pradesh योजना जारी
विवाद के बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया कि AI विकास जारी रहेगा:
प्रमुख योजनाएं:
- Lucknow AI City (40 एकड़)
- स्कूलों में AI शिक्षा (Class 9–12)
- Nivesh Mitra 3.0 प्लेटफॉर्म
सरकार नए और अनुभवी साझेदारों की तलाश में है।
🧾 निष्कर्ष: स्टार्टअप और सरकार के लिए सबक
Puch AI विवाद ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं:
स्टार्टअप्स के लिए:
- वित्तीय पारदर्शिता जरूरी
- तकनीकी विश्वसनीयता साबित करनी होगी
- hype और reality में संतुलन जरूरी
सरकार के लिए:
- MoU से पहले सख्त जांच
- बड़े प्रोजेक्ट्स में जोखिम मूल्यांकन
यह घटना भारतीय AI ecosystem के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
‘AI Pradesh’ का सपना अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि:
👉 बड़े विजन के साथ मजबूत आधार भी जरूरी है
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