Quantum Computing Components: क्या है यह नई हार्डवेयर इंडस्ट्री?
जब क्वांटम कंप्यूटर के पुर्जे बाजार में मिलने लगेंगे...
- ►क्वांटम कंप्यूटर के पार्ट्स बनाने वाली एक नई वैश्विक इंडस्ट्री तेजी से उभर रही है
- ►कंपनियां अब पूरे क्वांटम कंप्यूटर बनाने के बजाय केवल विशिष्ट पुर्जे तैयार कर रही हैं
- ►क्रायोजेनिक केबल्स और माइक्रोवेव एटेन्यूएटर्स की मांग में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है
- ►भारत के नेशनल क्वांटम मिशन (NQM) को इस नए हार्डवेयर सप्लाई चेन से सीधा फायदा होगा
- ►स्टार्टअप्स के लिए अब महंगे और कस्टमाइज्ड हार्डवेयर के आयात की निर्भरता कम होगी
कल्पना कीजिए कि आपको अपने घर के लिए एक नया डेस्कटॉप कंप्यूटर असेंबल करना है। आप क्या करेंगे? आप दिल्ली के नेहरू प्लेस या मुंबई के लैमिंगटन रोड जैसे किसी इलेक्ट्रॉनिक मार्केट में जाएंगे। वहां से आप इंटेल का प्रोसेसर, आसुस का मदरबोर्ड, कॉर्सेयर की रैम और किंग्स्टन की एसएसडी खरीदेंगे और सबको एक साथ जोड़कर अपना पीसी तैयार कर लेंगे। यह बेहद आसान और किफायती है क्योंकि कंप्यूटर पार्ट्स की एक पूरी इंडस्ट्री मौजूद है।
लेकिन क्या आप यही काम एक क्वांटम कंप्यूटर के साथ करने की सोच सकते हैं? अब तक का जवाब था—बिल्कुल नहीं! आज से कुछ समय पहले तक अगर आईबीएम (IBM), गूगल या रिगेटी (Rigetti) जैसी किसी दिग्गज कंपनी को क्वांटम कंप्यूटर बनाना होता था, तो उन्हें स्क्रू से लेकर सुपरकंडक्टिंग चिप और रेफ्रिजरेटर तक सब कुछ खुद ही डिजाइन और मैन्युफैक्चर करना पड़ता था। लेकिन अब यह पूरी तस्वीर बदलने वाली है।
IEEE Spectrum की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में एक नई 'क्वांटम कंपोनेंट्स इंडस्ट्री' (Quantum Components Industry) का उदय हो रहा है। इसका मतलब है कि अब क्वांटम कंप्यूटर बनाने के लिए हर चीज खुद बनाने की जरूरत नहीं होगी। बाजार में ऐसी विशेषज्ञ कंपनियां आ चुकी हैं जो इस बेहद जटिल तकनीक के अलग-अलग पुर्जे (Components) बनाकर बेच रही हैं। यह सुपरकंप्यूटिंग की दुनिया में एक बहुत बड़ा बदलाव है।
क्या है यह क्वांटम कंपोनेंट्स इंडस्ट्री और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
क्वांटम कंप्यूटर सामान्य कंप्यूटरों की तरह साधारण बाइनरी बिट्स (0 और 1) पर काम नहीं करते। ये 'क्विबिट्स' (Qubits) का इस्तेमाल करते हैं, जो एक ही समय में 0 और 1 दोनों अवस्थाओं में रह सकते हैं। इस क्षमता को सुपरपोजिशन कहा जाता है। लेकिन इन क्विबिट्स को संभालना दुनिया के सबसे नाजुक काम में से एक है। इन्हें काम करने के लिए अंतरिक्ष से भी ज्यादा ठंडे तापमान की आवश्यकता होती है—लगभग शून्य से 273 डिग्री सेल्सियस नीचे (Absolute Zero)।
इतने कम तापमान पर सामान्य तांबे के तार या इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तुरंत बेकार हो जाते हैं। इसके लिए खास क्रायोजेनिक उपकरणों की जरूरत होती है। जब तक कोई एक कंपनी पूरे सिस्टम को अकेले बना रही थी, तब तक क्वांटम कंप्यूटरों का बड़े पैमाने पर उत्पादन और उनकी कीमतों को कम करना नामुमकिन लग रहा था।
अब, इसी समस्या को हल करने के लिए कई छोटी और स्पेशलाइज्ड कंपनियां सामने आई हैं। ये कंपनियां पूरे क्वांटम कंप्यूटर बनाने के बजाय केवल उसके विशिष्ट अंगों को बेहतर और कुशल बनाने में जुट गई हैं। ठीक वैसे ही जैसे ऑटोमोबाइल सेक्टर में टायर कोई और बनाता है, इंजन कोई और और गियरबॉक्स कोई और!
क्वांटम कंप्यूटर के ये 'खास' पुर्जे कौन से हैं?
इस नई इंडस्ट्री के तहत मुख्य रूप से तीन तरह के कंपोनेंट्स पर काम किया जा रहा है:
1. क्रायोजेनिक केबल्स (Cryogenic Cables)
क्वांटम चिप को बाहरी दुनिया से जोड़ने के लिए तारों की जरूरत होती है। लेकिन ये तार साधारण नहीं हो सकते क्योंकि बाहर की गर्मी इन तारों के जरिए क्वांटम चिप तक पहुंच सकती है, जिससे क्विबिट्स नष्ट हो सकते हैं। इसलिए, अब ऐसी विशेष सुपरकंडक्टिंग केबल्स बनाई जा रही हैं जो सिग्नल तो तेजी से भेजती हैं, लेकिन गर्मी को बिल्कुल भी अंदर नहीं जाने देतीं।2. माइक्रोवेव एटेन्यूएटर्स और एम्पलीफायर्स (Microwave Attenuators and Amplifiers)
क्विबिट्स को नियंत्रित करने के लिए माइक्रोवेव सिग्नलों का उपयोग किया जाता है। ये सिग्नल बहुत ही सटीक होने चाहिए। माइक्रोवेव एटेन्यूएटर्स इन सिग्नलों की ताकत को नियंत्रित करते हैं ताकि संवेदनशील क्विबिट्स को कोई नुकसान न पहुंचे। वहीं, वापस आने वाले कमजोर सिग्नलों को पढ़ने के लिए खास एम्पलीफायर्स की जरूरत होती है जो बिना किसी अतिरिक्त शोर (Noise) के काम कर सकें।3. लेजर और ऑप्टिकल सिस्टम (Lasers and Optical Systems)
कई क्वांटम कंप्यूटर (जैसे ट्रैप्ड-आयन या फोटोनिक सिस्टम) प्रकाश और लेजर बीम का उपयोग करके क्विबिट्स को नियंत्रित करते हैं। इस तकनीक के लिए अत्यधिक स्थिर और सटीक वेवलेंथ वाले लेजर की आवश्यकता होती है, जिसे अब विशेष ऑप्टिक्स कंपनियां तैयार कर रही हैं।भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
इस उभरती हुई इंडस्ट्री का भारत पर बहुत गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ने वाला है। भारत सरकार ने देश में क्वांटम रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए 'नेशनल क्वांटम मिशन' (National Quantum Mission - NQM) शुरू किया है। इस मिशन के तहत भारतीय वैज्ञानिक और स्टार्टअप्स स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने पर काम कर रहे हैं।
पहला फायदा: रिसर्च और स्टार्टअप्स के लिए कम लागत अब तक भारतीय शोधकर्ताओं को क्वांटम प्रयोगों के लिए आवश्यक हर छोटे-छोटे पुर्जे को विदेशों से कस्टम-ऑर्डर देकर मंगाना पड़ता था। यह प्रक्रिया बहुत महंगी और समय लेने वाली थी। लेकिन जब क्वांटम कंपोनेंट्स बाजार में स्टैंडर्ड प्रोडक्ट के रूप में मिलने लगेंगे, तो भारतीय स्टार्टअप्स और लैब्स (जैसे IISc और IITs) आसानी से इन पार्ट्स को खरीदकर अपने प्रयोगों को तेजी से आगे बढ़ा सकेंगे।
दूसरा फायदा: भारत बन सकता है मैन्युफैक्चरिंग हब भारत में पहले से ही एक मजबूत सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइनिंग इकोसिस्टम मौजूद है। इस नई कंपोनेंट इंडस्ट्री के आने से भारतीय हार्डवेयर निर्माताओं के लिए एक बड़ा अवसर खुला है। भारतीय कंपनियां वैश्विक क्वांटम सप्लाई चेन का हिस्सा बनकर क्रायोजेनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रिसिजन लेजर और नैनो-फैब्रिकेटेड कंपोनेंट्स का निर्माण और निर्यात कर सकती हैं।
भविष्य की राह: क्या क्वांटम कंप्यूटर सस्ते होंगे?
जैसे-जैसे यह सप्लाई चेन मजबूत होगी, क्वांटम कंप्यूटरों की लागत में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। अभी एक पूर्ण क्वांटम कंप्यूटर की कीमत करोड़ों डॉलर में होती है, जिसे केवल बड़ी टेक कंपनियां या सरकारी एजेंसियां ही वहन कर सकती हैं। लेकिन पुर्जों के मानकीकरण (Standardization) से यह तकनीक अधिक सुलभ हो जाएगी।
आने वाले समय में, हम देख सकते हैं कि क्लाउड-आधारित क्वांटम कंप्यूटिंग के अलावा कंपनियां अपने निजी डेटा सेंटर्स में छोटे और पोर्टेबल क्वांटम को-प्रोसेसर लगाने में सक्षम होंगी। यह ठीक वैसा ही होगा जैसे आज हम अपने कंप्यूटरों में भारी ग्राफिक्स वाले कामों के लिए अलग से जीपीयू (GPU) लगाते हैं।
निष्कर्ष
क्वांटम कंप्यूटिंग अब केवल प्रयोगशालाओं में बंद रहने वाली अकादमिक रिसर्च नहीं रह गई है। यह एक पूर्ण व्यावसायिक उद्योग का रूप ले रही है। क्वांटम कंपोनेंट्स की इस नई और उभरती हुई इंडस्ट्री ने साबित कर दिया है कि भविष्य की सुपरकंप्यूटिंग अब ज्यादा दूर नहीं है। भारत के लिए इस बहती गंगा में हाथ धोने और खुद को एक ग्लोबल क्वांटम लीडर के रूप में स्थापित करने का यह सबसे सही समय है।
क्या आपको लगता है कि भारत इस नई क्वांटम हार्डवेयर क्रांति में दुनिया का नेतृत्व कर पाएगा? क्या हमारे इंजीनियर्स इस जटिल तकनीक के पुर्जे बनाने में चीन और अमेरिका को टक्कर दे पाएंगे? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!
क्वांटम कंप्यूटर के लिए अब अलग से मिलने लगेंगे कंपोनेंट्स। जानिए कैसे यह उभरती हुई हार्डवेयर इंडस्ट्री बदल देगी सुपरकंप्यूटिंग का पूरा ढांचा।
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