आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26: शिक्षा और स्वास्थ्य पर क्या कहती है सरकार की रिपोर्ट?

नई दिल्ली: भारत सरकार ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 पेश कर दिया है। इस सर्वे में देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम सामाजिक क्षेत्रों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इन दोनों क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने में अच्छी प्रगति की है, लेकिन गुणवत्ता और समानता अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 का कवर – भारत की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य को दर्शाता हुआ चित्र

शिक्षा क्षेत्र: स्कूल तो पहुँचे बच्चे, लेकिन सीखना अभी कमजोर

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत का शिक्षा तंत्र दुनिया के सबसे बड़े शिक्षा तंत्रों में से एक है।
देश में आज:

  • 14 लाख से अधिक स्कूल

  • लगभग 24 करोड़ छात्र

  • 1 करोड़ से ज्यादा शिक्षक

काम कर रहे हैं। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर नामांकन दर में सुधार हुआ है, जिसे सरकार एक सकारात्मक उपलब्धि मानती है।

लेकिन रिपोर्ट साफ कहती है कि सीखने के नतीजे (Learning Outcomes) उम्मीद के मुताबिक नहीं हैं।
कई राज्यों में बच्चे:

  • अपनी कक्षा के स्तर के अनुसार पढ़ नहीं पा रहे

  • बुनियादी गणित में कमजोर पाए गए

इसी वजह से सर्वेक्षण में फाउंडेशनल लर्निंग यानी शुरुआती शिक्षा पर खास जोर दिया गया है।


डिजिटल शिक्षा से उम्मीद, लेकिन अकेले समाधान नहीं

सरकार का मानना है कि डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन कंटेंट और टेक्नोलॉजी आधारित पढ़ाई से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
हालाँकि रिपोर्ट यह भी मानती है कि:

  • केवल मोबाइल या इंटरनेट से समस्या हल नहीं होगी

  • शिक्षकों का प्रशिक्षण

  • व्यक्तिगत मार्गदर्शन

  • और कमजोर छात्रों के लिए अलग सहायता

जैसे कदम जरूरी हैं।


उच्च शिक्षा: नामांकन बढ़ा, रोजगार की चिंता बनी

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़ी है।
लेकिन इसके साथ ही कुछ गंभीर सवाल भी उठाए गए हैं:

  • क्या पढ़ाई रोजगार के योग्य बना रही है?

  • क्या सभी संस्थानों की गुणवत्ता समान है?

रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अब डिग्री के साथ-साथ स्किल पर ज्यादा ध्यान देना होगा, ताकि युवाओं को नौकरी के बेहतर अवसर मिल सकें।


स्वास्थ्य क्षेत्र: सरकारी योजनाओं से सुधार

स्वास्थ्य के मोर्चे पर आर्थिक सर्वेक्षण सरकार की योजनाओं को प्रभावी बताता है।
खासकर:

  • आयुष्मान भारत योजना

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन

  • मातृ और शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम

की वजह से इलाज की पहुँच बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, बीते वर्षों में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है।


बढ़ता स्वास्थ्य खर्च, फिर भी असमानता

आर्थिक सर्वेक्षण बताता है कि सरकार का स्वास्थ्य पर खर्च लगातार बढ़ रहा है
इसके बावजूद:

  • ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में डॉक्टरों की कमी

  • सरकारी अस्पतालों पर बढ़ता दबाव

  • निजी इलाज की ऊँची लागत

जैसी समस्याएँ बनी हुई हैं।


नई चिंता: मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली रोग

रिपोर्ट में पहली बार मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल लत जैसे मुद्दों को गंभीर चुनौती के रूप में देखा गया है।
इसके अलावा:

  • डायबिटीज

  • हृदय रोग

  • मोटापा

जैसे गैर-संचारी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, अब इलाज के साथ-साथ रोकथाम (Prevention) पर ध्यान देना जरूरी है।


“सोशल सेक्टर पैराडॉक्स”: योजना है, लेकिन असर सीमित

आर्थिक सर्वेक्षण ने शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति को “Social Sector Paradox” कहा है।
इसका मतलब है:

  • योजनाएँ मौजूद हैं

  • पैसा खर्च हो रहा है

  • कवरेज बढ़ रही है

लेकिन गुणवत्ता, समानता और वास्तविक असर अब भी हर जगह एक-सा नहीं है।


आगे की राह: खर्च नहीं, नतीजे अहम

रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि अब सरकार का फोकस केवल बजट बढ़ाने पर नहीं, बल्कि परिणाम मापने पर होगा।
जैसे:

  • बच्चे वास्तव में क्या सीख रहे हैं

  • इलाज से लोगों की सेहत में कितना सुधार हो रहा है


निष्कर्ष: शिक्षा और स्वास्थ्य ही भारत की असली ताकत

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 यह साफ करता है कि भारत ने शिक्षा और स्वास्थ्य में बुनियादी ढांचे और पहुँच के स्तर पर अच्छी प्रगति की है।
लेकिन अगर भारत को आने वाले वर्षों में एक विकसित अर्थव्यवस्था बनना है, तो गुणवत्ता, कौशल और समान अवसर पर गंभीरता से काम करना होगा.

Reference Article : Economic Survey

FAQ 1

प्रश्न: आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 क्या है?
उत्तर: आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 भारत सरकार की वार्षिक रिपोर्ट है, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास से जुड़ी स्थिति का विश्लेषण किया जाता है।

FAQ 2

प्रश्न: आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में शिक्षा को लेकर क्या कहा गया है?
उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार स्कूलों में नामांकन बढ़ा है, लेकिन सीखने की गुणवत्ता और बुनियादी शिक्षा अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

FAQ 3

प्रश्न: स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्थिक सर्वेक्षण क्या संकेत देता है?
उत्तर: सर्वे बताता है कि सरकारी योजनाओं से इलाज की पहुँच बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों, मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली रोगों पर अभी और काम जरूरी है।

FAQ 4

प्रश्न: Social Sector Paradox क्या है?
उत्तर: इसका मतलब है कि योजनाएँ और खर्च बढ़ने के बावजूद शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता और समानता हर जगह समान नहीं है।

FAQ 5

प्रश्न: आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह रिपोर्ट सरकार की नीतियों, भविष्य की योजनाओं और भारत की मानव पूंजी की दिशा को समझने में मदद करती है।

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